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गर्भ संस्कार क्या है?

प्राचीन भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार गुणों का विकास एवं दोषों का क्षय ही संस्कार कहलाता है। अच्छे कर्मों की पुनरावृत्ति शनैः शनैः हमारा स्वभाव बन जाता है। यही संस्कारीत करने की प्रक्रिया है।

गर्भावस्था के काल में, गर्भ में पल रहे शिशु में सद्गुण, नैतिक मुल्य व संस्कार प्रदान करना ही गर्भ संस्कार कहलाता है। चुंकि गर्भावस्था वह काल है जहाँ शिशु के सम्पुर्ण जीवन का आधार निर्मित होता है इसलिए यह एक महत्वपुर्ण अवस्था है जिसमे शिशु के स्वास्थ्य, व्यवहार, प्रकृति व लगभग सम्पुर्ण जीवन को प्रभावित किया जा सकता है।

'संस्कारित'बच्चे को जन्म देना दो बातों पर निर्भर करता है।

1)    प्रारब्ध : हमारे पिछले जन्मों के कर्म

2)    पुरुषार्थ : संतान में गुण उत्पन्न करने के लिए इस जन्म में किए गए प्रयास

दुर्भाग्यवश, प्रारब्ध पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है, परन्तु हम निश्चित रूप् से पुरुषार्थ से अपने शिशु को संस्कारवान बना सकते है।गर्भ संस्कार की पूरी प्रक्रियायही है जिसमे माता-पिता व परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए सम्मिलित प्रयास शामिल है।

इस प्रक्रिया को एक उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है। एक छात्र अच्छा गणितज्ञ हो सकता है यदि उसके पास अच्छा गणितिय मस्तिष्क है (प्रारब्ध द्वारा)। दूसरी व अधिक महत्वपुर्ण बात यह है कि उसके मस्तिष्क, ह्दय व आत्मा को गणित से जुड़ने के लिए किस प्रकार अभ्यास (पुरुषार्थ) कराया गया है। इस प्रकार हम समझ सकते है, एक महान गणितज्ञ बनने के लिए किसी गणितिय मस्तिष्क को उचित अभ्यास द्वारा बचपन से तैयार करना आवश्यक है।

गर्भ संस्कार एक गहन विज्ञान भी है और एक अद्भुत कला भी। गर्भ संस्कार की प्रक्रिया उसी क्षण से आरंभ हो जाती है, जिस क्षण कोई युगल, संतान उत्पन्न करने का निर्णय लेता है। एक श्रेष्ठ व दिव्य आत्मा को गर्भ में आमंत्रित करने के लिए, एक ऐसी परिस्थिति आवष्यक है जो शारिरिक, मानसिक व आध्यात्मिक रूप से उस दिव्य आत्मा के अनुकुल हो। गर्भावस्था के समय माता व पिता दोनों को ही अपने अजन्मे शिशु के लिए एक श्रेष्ठ वातावरण देने के उत्तरदायित्व को समझना चाहिए। ऐसा वातावरण जहाँ शिशु में सकारात्मकता, आत्मविश्वास, मानसिक व शारिरिक स्वास्थ्य जैसे गुण शिशु का स्वभाव ही बन जाए। ऐसा करने पर, जन्म के बाद शिशु अपने माता-पिता द्वारा सिखाये गए गुणों को बहुत तेजी से व गहराई से आत्मसात करता है। ऐसे शिशु अपने माता-पिता से भावनात्मक रूप से भी अधिक जुड़े होते है। साथ ही अपनी प्रतिभा एवं बुध्दिमत्ता से सभी को चमत्कृत करते है।

यह एक वैज्ञानिक तथ्य है जिसे हाल मे ही Cambridge University, London ने भी अनुमोदित किया है कि आप अपने इच्छित गुणों के लिए, गर्भावस्था के दौरान ही शिशु को “प्रोग्राम” कर सकते है। परन्तु आज की तेजी से भागती जीवन शैली और भौतिकवाद की अंधी दौड़ में हमने इस अद्भुत प्राचीन विज्ञान की उपेक्षा की है। कृष्णा कमिंग गर्भ संस्कार एप्प ने इसी प्राचीन विज्ञान को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है|